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मैथ्स के फॉर्मूले याद करने को मैथ्स पढ़ना नहीं कहा जाता : आशुतोष गोपाल

तिल्दा। ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा द्वारा आयोजित समर कैंप के आठवें दिन विद्यार्थियों को गणित विषय को सरल और रोचक तरीके से समझाने के उद्देश्य से विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर रायपुर के प्रसिद्ध मैथ्स शिक्षक आशुतोष गोपाल विशेष रूप से उपस्थित हुए और बच्चों को गणित पढ़ने के आसान एवं प्रभावी तरीके बताए।

उन्होंने विद्यार्थियों के मन में गणित को लेकर बनी कठिन विषय की धारणा को दूर करते हुए कहा कि यदि मैथ्स को समझकर पढ़ा जाए तो यह बेहद रोचक और आसान विषय बन जाता है। उन्होंने कहा कि केवल फॉर्मूले याद कर लेना ही गणित पढ़ना नहीं कहलाता, बल्कि उसके पीछे के सिद्धांत और उनके वास्तविक उपयोग को समझना अधिक आवश्यक है। प्रत्येक अध्याय को जीवन में उसके उपयोग के साथ समझने पर गणित में रुचि स्वतः बढ़ने लगती है।

आशुतोष सर ने बच्चों को तेज गणना (Fast Calculation) के लिए 20 तक के पहाड़े, 30 तक के स्क्वायर तथा 20 तक के क्यूब याद रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इनका नियमित अभ्यास बेहद जरूरी है और प्रत्येक सोमवार तथा गुरुवार को इनकी पुनरावृत्ति अवश्य करनी चाहिए। उन्होंने प्रतिशत, साधारण ब्याज तथा चक्रवृद्धि ब्याज जैसे कठिन समझे जाने वाले विषयों को भी बेहद सरल तरीके से समझाकर बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाया।

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा कि गणित ऐसा विषय है जिसे प्रतिदिन पढ़ना चाहिए। विशेष रूप से 9वीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों को कम से कम डेढ़ घंटे प्रतिदिन मैथ्स के लिए देना चाहिए। उन्होंने बताया कि कक्षा 6वीं से 8वीं तक का समय गणित की मजबूत नींव तैयार करने का होता है और यदि इस स्तर पर बेसिक्स अच्छे हो जाएं, तो आगे की कठिन कक्षाएं भी आसानी से समझ में आने लगती हैं।
सत्र के दौरान बच्चों ने करियर और पढ़ाई से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका आशुतोष सर ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि पढ़ाई के प्रति जितनी जल्दी गंभीरता आती है, उतनी ही अधिक सफलता प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है। अच्छी शिक्षा व्यक्ति को जीवन में सफलता, बेहतर जीवन स्तर और समाज में सम्मान दिलाने का मार्ग खोलती है।

कैंप के दूसरे सत्र में बच्चों के लिए ग्रुप डिस्कशन गतिविधि आयोजित की गई। इसमें बच्चों को पक्ष और विपक्ष में अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। “पर्यावरण सुधार में बच्चों की भूमिका”, “ऑनलाइन स्टडी बनाम ऑफलाइन क्लासेस” तथा “सोशल मीडिया विद्यार्थियों के लिए अच्छा या बुरा” जैसे विषयों पर बच्चों ने गहराई से अपने विचार प्रस्तुत किए। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों के विचार व्यक्त करने की क्षमता, आत्मविश्वास और तार्किक सोच का सुंदर विकास देखने को मिला।

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