जानकारी के अनुसार, पंचों द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान की तिथि निर्धारित की गई थी। पंचायत परिसर में मतदान को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। पंचायत सचिवालय से लेकर मतदान स्थल तक व्यवस्थाएं दुरुस्त थीं और पंचों सहित ग्रामीणों की नजरें इस अहम प्रक्रिया पर टिकी हुई थीं।
इसी बीच हाईकोर्ट से आए आदेश ने पूरे घटनाक्रम को पलट दिया। न्यायालय के निर्देश मिलते ही प्रशासन ने अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। बताया जा रहा है कि पहले जारी नोटिस को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए राहत दी, जिसके चलते प्रस्ताव पर होने वाला मतदान प्रभावहीन हो गया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ग्राम पंचायत देवरी में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पंचायत परिसर के बाहर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई थी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। सुबह से ही पंचायत भवन के आसपास ग्रामीणों और पंचों की आवाजाही बढ़ गई थी, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद माहौल अचानक शांत हो गया और पूरी प्रक्रिया थम गई।
अब आगे क्या?



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