तिल्दा क्षेत्र में प्रस्तावित एक औद्योगिक प्लांट को जारी की गई कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel अपने समर्थकों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ तिल्दा थाना परिसर के सामने धरने पर बैठ गए हैं।
धरने के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्लांट स्थापना की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए कथित रूप से फर्जी एनओसी जारी की गई है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल
धरने में शामिल ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट स्थापना से संबंधित अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। उनका कहना है कि यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप हुई हैं तो प्रशासन को पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की कि कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से मांगा जवाब
धरने को संबोधित करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि एनओसी किस आधार पर जारी की गई और क्या सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
मौके पर तैनात रहा पुलिस बल



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